उस दिन अकेले “बिरजू” ही लड़का पैदा हुए…रोचक जानकारी


कथक सम्राट बिरजू महाराज का निधन संगीत जगत के लिए बड़ी क्षति है। कथक के पर्याय रहे बिरजू महाराज देश के प्रसिद्ध शास्त्रीय नर्तक थे। वे भारतीय नृत्य की कथक शैली के आचार्य और लखनऊ के ‘कालका-बिंदादीन’ घराने के प्रमुख थे। उनके जन्म से लेकर मृत्यु तक की कहानी काफी रोचक है।

पिता को गोद में नजर आए पूत के पांव
पिता अच्छन महाराज को अपनी गोद में महज तीन साल की उम्र में ही बिरजू की प्रतिभा दिखने लगी थी। इसी को देखते हुए पिता ने बचपन से ही अपने यशस्वी पुत्र को कला दीक्षा देनी शुरू कर दी। किंतु इनके पिता की शीघ्र ही मृत्यु हो जाने के बाद उनके चाचाओं, सुप्रसिद्ध आचार्यों शंभू और लच्छू महाराज ने उन्हें प्रशिक्षित किया। कला के सहारे ही बिरजू महाराज को लक्ष्मी मिलती रही। उनके सिर से पिता का साया उस समय उठा, जब वह महज नौ साल के थे।

सुर संगीत के महारथी बन उभरे, कई नृत्यावलियां बनाईं
बचपन से मिली संगीत व नृत्य की घुट्टी के दम पर बिरजू महाराज ने विभिन्न प्रकार की नृत्यावलियों जैसे गोवर्धन लीला, माखन चोरी, मालती-माधव, कुमार संभव व फाग बहार इत्यादि की रचना की। सत्यजीत राॅय की फिल्म ‘शतरंज के खिलाड़ी’ के लिए भी इन्होंने उच्च कोटि की दो नृत्य नाटिकाएं रचीं। इन्हें ताल वाद्यों की विशिष्ट समझ थी, जैसे तबला, पखावज, ढोलक, नाल और तार वाले वाद्य वायलिन, स्वर मंडल व सितार इत्यादि के सुरों का भी उन्हें गहरा ज्ञान था।

देश-विदेश में हजारों नृत्य प्रस्तुतियां दीं
1998 में अवकाश ग्रहण करने से पूर्व पंडित बिरजू महाराज ने संगीत भारती, भारतीय कला केंद्र में अध्यापन किया व दिल्ली में कत्थक केंद्र के प्रभारी भी रहे। इन्होंने हजारों संगीत प्रस्तुतियां देश में देश के बाहर दीं। बिरजू महाराज ने कई प्रतिष्ठित पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त किए। उन्हें प्रतिष्ठित ‘संगीत नाटक अकादमी’ , ‘पद्म विभूषण’ मिला। मध्य प्रदेश सरकार सरकार द्वारा इन्हें ‘कालिदास सम्मान’ से नवाजा गया।

बिरजू महाराज का जन्म 4 फरवरी 1938 को लखनऊ के ‘कालका-बिन्दादीन घराने’ में हुआ था। बिरजू महाराज का नाम पहले दुखहरण रखा गया था। यह बाद  में बदल कर ‘बृजमोहन नाथ मिश्रा’ हुआ। इनके पिता का नाम जगन्नाथ महाराज था, जो ‘लखनऊ घराने’ से थे और वे अच्छन महाराज के नाम से जाने जाते थे। बिरजू महाराज जिस अस्पताल में पैदा हुए, उस दिन वहां उनके अलावा बाकी सब लड़कियों का जन्म हुआ था, इसी वजह से उनका नाम बृजमोहन रख दिया गया। जो आगे चलकर ‘बिरजू’ और फिर ‘बिरजू महाराज’ हो गया।
13 साल की उम्र में दिल्ली में सिखाने लगे थे नृत्य
बिरजू महाराज ने मात्र 13 साल की उम्र में ही दिल्ली के संगीत भारती में नृत्य की शिक्षा देना आरम्भ कर दिया था। उसके बाद उन्होंने दिल्ली में ही भारतीय कला केन्द्र में सिखाना आरम्भ किया। कुछ समय बाद इन्होंने कत्थक केन्द्र (संगीत नाटक अकादमी की एक इकाई) में शिक्षण कार्य आरंभ किया। यहां ये संकाय के अध्यक्ष थे तथा निदेशक भी रहे। तत्पश्चात 1998 में इन्होंने वहीं से सेवानिवृत्ति पाई। इसके बाद कलाश्रम नाम से दिल्ली में ही एक नाट्य विद्यालय खोला।

पांच बच्चों व नाती पोतों का परिवार छोड़ गए
बिरजू महाराज का भरापूरा परिवार है। उनके पांच बच्चे हैं। इनमें तीन बेटियां और दो बेटे हैं। उनके तीन बच्चे ममता महाराज, दीपक महाराज और जय किशन महाराज भी कथक की दुनिया में नाम रोशन कर रहे हैं।

ये पुरस्कार भी मिले
बिरजू महाराज को कई सम्मान मिले। 1986 में उन्हें पद्म विभूषण से नवाजा गया। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा कालिदास सम्मान प्रमुख हैं। इनके साथ ही इन्हें काशी हिन्दू विश्वविद्यालय एवं खैरागढ़ विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि मानद मिली। 2016 में हिन्दी फ़िल्म बाजीराव मस्तानी में ‘मोहे रंग दो लाल’ गाने पर नृत्य-निर्देशन के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। 2002 में उन्हें लता मंगेश्कर पुरस्कार से नवाजा गया। 2012 में ‘विश्वरूपम’ के लिए सर्वश्रेष्ठ नृत्य निर्देशन का और 2016 में ‘बाजीराव मस्तानी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ नृत्य निर्देशन का फिल्म फेयर पुरस्कार मिला।

साभार अमर उजाला

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विकास शर्मा

संपादक:विकास शर्मा

मो.:+91 9827076006

चायना डोर बेचने वाले का मकान तोड़ा जा रहा

उज्जैन। कल चायना की डोर मे फंसकर जान गाँवाने वाली बेटी को लेकर प्रशासन की निष्क्रियता पर उठी ऊँगली के चलते आज प्रशासन डोर बेचने वालो पर सख्त हो गया। चायना डोर बेचने वाले व्यापारियों पर दनादा चलाते हुए न सिर्फ प्रकरण दर्ज किया जा रहा बल्कि उनके अवैध निर्माणो पर बल्डोज़र भी चलाया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक 1 घटना तो घट चुकी लेकिन भविष्य मे ऐसा न हो इसके लिए सख्त कार्यवाही की जा रही है। थोड़ी दर मे हम देंगे और अपडेट।

फोटो साभार व्हाट्सअप

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विकास शर्मा

संपादक:विकास शर्मा

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मै हूँ नेहा का हत्यारा

👹 तिरिभिन्नाट एक्सप्रेस👹

भिया राम..🙏🏻
जी हां, सही पढ़ा आपने..कल चायना की डोर से दर्दनाक मौत हो गयी..दिन भर सोशल मीडिया पे बड़ी-बड़ी बातें हुई..ज्ञान पेले गये..प्रशासन को कोसा गया..और सवाल दागे गये के जिम्मेदार कौन.?
तो इस हत्या की पूरी ज़िम्मेदारी मैं लेता हूँ..इसका जिम्मेदार मैं हूँ..यकीन करिये यही अपराधबोध पोस्ट पढ़ रहे हर व्यक्ति को होना चाहिए..
मैं इसलिए इस हत्या का जिम्मेदार हूँ क्योंकि मैंने वो चायना की डोर प्रतिबंध के बावजूद जुगाड़ करके ऊँचे भाव मे खरीदी..खुद नही खरीदी तो घर मे अन्य के खरीदने पर चुप रहा..घर मे न भी आयी हो पर आसपड़ोस मे उपयोग होती देखने पर चुप रहा..भले रोकने के जिम्मेदार लोगो की विफलता से हत्यारा धागा खूब बिका..पर मैं लेकर आया तो अपराध मेरा भी कम नही..
..मैं वही नकली देशभक्त हूँ जो सोशल मीडिया पर बदलाव के msg फॉरवर्ड करता हूँ..लेकिन खुद पर लागू करते समय सोचता हूँ..”चलता है यार”..
…मैं वही हूँ जो हेलमेट पर चालान बनाती पुलिस को उल्लू समझता हूं,लेकिन दुर्घटना मे मौत पर पुलिस को कोसता हूँ..
..कल से सभी लोग पुलिस को खूब कोस रहे..कोसा भी जाना चाहिए..पुलिस ने क्यो बिकने दी..?
..लेकिन मेरी अंतरात्मा भी सवाल करती है मुझसे…कि आखिर मैं जुगाड़ से चायना की चकरी लाया तो मैने क्यो नही पुलिस को उस जगह की ख़ुफ़िया जानकारी दे दी.?
..निश्चित ही पुलिस भी इस हत्या की भागीदार है..लेकिन मेरी नजर मे मुख्य आरोपी तो मैं ही हूँ..
“बिक रही थी तो खरीदी”
का दूसरा पक्ष है “खरीदोगे तो ही बिकेगी”
अब कितने ही तर्क,वितर्क,कुतर्क हो..
नेहा तो जा चुकी..त्योहारों के उल्लहास मे खुशी खुशी बाजार जा रही एक बिटिया की हत्या मैने,आपने,जिम्मेदारी पूरी न करने वाले प्रशासन ने कर दी…
अब चाहे लकीर पीटो..केस दर्ज करो..नेहा नही लौटेगी..फिर धीरे धीरे हमारे इस गर्म दूध से उबलते गुस्से पर मलाई की मोटी थर जम जाएगी..अगली संक्रांति पर फिर कोई नेहा मारी जायेगी…न इस देश मे कुछ बदला है और न बदलेगा..जब तक हम अपना कर्तव्य न निभाकर हर बात को प्रशासन के सिर ढोलते रहेंगे…बस हम यूं ही बोलते रहेंगे..फोकट ज्ञान पेलते रहेंगे..
श्रद्धांजलि नेहा 🙏🏻😭😭
जा रिया अब
भारत माता की जय
विकास शर्मा
दैनिक अमर श्याम उज्जैन
9827076006
16/01/2022
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विकास शर्मा

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अबे 9 बजे उठने वालों,तुम क्या संकरात मनाओगे
🔶🔷🔻🔷🔶😡😡

👹 तिरिभिन्नाट एक्सप्रेस👹
अबे 9 बजे उठने वालों,तुम क्या संकरात मनाओगे
🔶🔷🔻🔷🔶
😡😡
भिया राम..🙏🏻
सुबे 9 बजे तक बिस्तर मे पड़े रेने वालो..ब्रश और नाश्ता करके छत पे जाने वालो..पेले से बेंडेज लगाने वालो..रेडीमेड उचका खरीदने वालो..बिना लूटे, खरीदी पतंग उड़ाने वालो..सेलो टेप का पूरा बंडल पास मे रखके..चश्मा-टोपी लागके पतंग उड़ाने वालो..
तुम क्या संकरात मनाओगे..क्या तो इंजॉय करोगे..ने क्या तो त्यौहार को समझ पाओगे..
अरे पतंग तो हमने उड़ाई..सफ़ेद गट्टा लाइन मे लग के लिया है..वो बी गुल्लक फोड़ के..बाप होन से बना बनाया उचका मांग लेते तो ऐसे घूरते थे के जायदाद मांग ली होय..ने आजकल के बच्चे क्या जाने उस टाइम का हमारा स्ट्रगल.. गट्टा आ जाये तो सूतने की जुगाड़..2 महीने पेले से फोड़ी हुई टूबलाइट अवेरना..उसको पीसना..सरेस उकालने का बर्तन कबाड़ना..ने तरे तरे के कलर उकालना..कोई सें (ढील) तो कोई हेंच,खेंच की मांगता..ने उचका लपेटने के लिए सायकिल नी मिले तो कैसे कैसे सेबड़िये होन के हाथ जोड़े हैँ तुमको क्या पता..🙄
ने डोर सुता जाये तो उसको मंगलनाथ साइड सुखाने जाना..आने मे अंधेरा हो जाए तो गली के मोड़ पे ज 1,2 मम्मी पापा होन गीली डंडी लेके स्वागत मे तैयार 😢
पूजा पत्री हो जाती पर मजाल है होंसला कम हो जाए भाई होन का..कुटा पिटा के आंसू पोंछ के रोटी खाके फिर गली मे..सुबे की तैयारी..पतंग होन के जोते बांधते..फिर सारी रात आँखों मे कटती.. ने जैसे मौका लगा के छत पे..ओर ये मरी ओस बी इन ही दिन मे गिरती..पतंग के काँप-टिड्डे गल जाते..🥺
और जब ढेर पतंग उड़ने लगती तो अपने पास रखी हुई पतंग से ज्यादा नजर उड़ती हुई आ जाये इसपे रेती..और वो नजर भी बिल्कुल प्रेम चोपडा जैसी गंदी वाली..🤣🤣
नीचे से नहाने की आवाज बार बार..”अच्छा मत नहा..मुह पे गोली ज मार ले..ब्रश कर ले..पोटी बी नी करके गया रे” 🤣🤣
जैसे तैसे गोली मारी..1 निवाला इधर ने 1 उधर रखा ने फिर ऊपर..ने जब रात पड़ जाये और बाप की “तु नीचे आ रिया के मै ऊपर आऊं” वाली चेतावनी नी आ जाये..हम उतरते नी थे..😜
अब कां वो रौनक ने कां वो बचपन..अब तो भरा जाओ तुम सब मोबाइल मे..1 दिन का त्यौहार..ने सब बिल्कुल जिगर के टुकड़े इकलौते-दोलोते..तो 100 मांगो तो हम 500 दें..सब मिल जाता अब तो तैयार..
और भी बहोत यादें हैँ जो तुम बस सुन ही सकते हो..बचपन तो सच मे हमने जिया..
तो भिया छत पे जाओ..करो इंजॉय..
सभी को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं
😜जा रिया अब
भारत माता की जय
विकास शर्मा
दैनिक अमर श्याम उज्जैन
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14/01/2022
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1 बेटी की जान ले गयी चायना की डोर

उज्जैन्। प्रशासन कितने ही दावे कर ले कि प्रतिबंधित चायना की डोर नही बिकने दी जाएगी लेकिन हकीकत क्या है ये घर पर कटकर आयी पतंग मे बंधी डोर ही बयान कर देती है। घर घर चायना की डोर से बच्चे पतंग उड़ा रहे हैँ और घायल भी हो रहे हैँ। आज 1 बेटी की जान चायना डोर से गला कटने से चली गयी। मिली जानकारी के अनुसार ग्राम कुकलखेड़ा महिदपुर की रहने वाली नेहा अंजना पिता अंतर सिंह अपने मामा की बेटी के साथ स्कूटी से फ्रीगंज जा रही थी तभी 0 पॉइंट ब्रिज पर अचानक डोर सामने आ गयी। लड़की सम्भल पाती उससे पहले उसका गला गहराई तक कट गया। राहजन हो अस्पताल ले गये जहां ज्यादा खूब बह जाने से उसने दम तोड़ दिया। अब पुलिस अज्ञात के खिलाफ प्रकरण दर्ज करेगी लेकिन 1 जान तो चली गयी जिसका कोई जिम्मेदार नही।

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31 जनवरी तक स्कूल रहेंगे बंद- और भी निर्देश

भोपाल।
मध्य प्रदेश में कोरोना के बढ़ते संकट को देखते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आपदा प्रबंधन समूह की बैठक ले रहे थे। दरअसल इस बैठक में सभी मंत्री, विधायक सहित कलेक्टर-अधिकारी को शामिल किया गया था। 11:00 बजे से शुरू हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग माध्यम से इस बैठक में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (scindia) भी मौजूद रहे। सीएम शिवराज ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जो भी लोग अपना पता गलत दे, उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाए। ऐसे लोग तेजी से संक्रमण को फैलाने के जिम्मेदार हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि तीसरी लहर में अभी इस तरह की पिक सामने आ रही है। जल्द ही केस और तेजी से बढ़ेंगे। वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राहत की बात यह है कि संक्रमित मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं पड़ रही है। उन्होंने होम आइसोलेशन पर सभी कलेक्टरों को ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
CM शिवराज ने कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि जो भी व्यक्ति गलत पता है मोबाइल नंबर दे रहे हैं उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज करें गलत पता और मोबाइल नंबर देने वाले लोग तेजी से संक्रमण फैलाने के जिम्मेदार हो रहे हैं। वहीं प्रदेश में कोरोना की संक्रमण दर 6 फीसद हो गई है। वहीं दूसरी ओर की तुलना में तीसरी लहर में कैसे 3 गुना ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं। दुनिया में 1 दिन में 34 लाख मामले देखने को मिल रहे हैं।
सीएम शिवराज ने कहा कि कोविड से तीसरी लहर से मुकाबले की तैयारी चाक-चौबंद और व्यवस्थाएं दुरुस्त रखें। टीकाकरण का कार्य निरंतर जारी रहे। बैठक में सीएम शिवराज ने इंदौर में निजी तौर पर अधिक टेस्ट की जानकारी मिलने पर निर्देश देते हुए कहा कि यदि प्रायवेट रूप से टेस्ट हों तो उन्हें भी रिकॉर्ड में लिया जाए।
सीएम शिवराज ने कहा कि कोविड के 3.3 प्रतिशत मरीज ही एडमिट हैं, चिंता नहीं करना है लेकिन असावधान भी नहीं होना है, व्यवस्थाएं बेहतर बनाकर रखें। इस लहर में सबसे जरूरी है होम आइसोलेशन। होम आइसोलेशन में सावधानी के प्रति जागरूकता फैलायें। सीएम शिवराज ने प्रदेश में टीकाकरण की स्थिति की जानकारी ली। सीएम शिवराज ने कहा कि वैक्सीनेशन के कार्य में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। घर-घर दस्तक दें, टीकाकरण का कार्य पूर्ण हो। वैक्सीन ही कोविड से सुरक्षा का मजबूत कवच है।
सीएम शिवराज ने कहा कि सभी मामलों की संख्या अभी और तेजी से बढ़ेगी। सब को सचेत और सावधान रहने की जरूरत है। राजधानी भोपाल में कलेक्टर अविनाश लवानिया ने जानकारी देते हुए बताया कि 3852 मरीज होम आइसोलेशन की सुविधा में हैं। जबकि कमांड सेंटर से प्रतिदिन उनसे बात की जा रही है। इंदौर कलेक्टर का कहना है कि इंदौर में 101 मरीज अस्पताल में भर्ती है लगातार मरीजों की देखभाल की जा रही है। बड़ी संख्या में लोगों की जांच की जा रही है।





क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

आज से कक्षा पहली से लेकर 12वीं तक स्कूलों को 31 जनवरी तक किया बंद रहेंगे ।

सभी प्रकार के मेले पारंपरिक या धार्मिक मेले नहीं लगेंगे।
धार्मिक स्थल खुले रहेंगे।
कोई भी जुलूस या रैली राजनीतिक हो या सामाजिक प्रतिबंध रहेगी।
हाल के अंदर कार्यक्रम किए जा सकते हैं लेकिन 50% उपस्थिति के साथ।
बड़ी रैली बड़ी सभा पूरी तरह से प्रतिबंध ।
सभी प्रकार की खेल गतिविधियां स्टेडियम की क्षमता के हिसाब से 50% संख्या के साथ बिना दर्शकों के वह आयोजित की जा सकेगी ।
प्री बोर्ड की परीक्षाएं 20 जनवरी से लिया जाना निश्चित किया। गया था इन परीक्षाओं को टेक होम एग्जाम के रूप में किया जाएगा स्कूलों में इस तरह की व्यवस्था बना ली जाए ।
हमारी कोशिश आर्थिक गतिविधियां बंद ना हो
नाइट कर्फ्यू जारी रहेगा। साभार


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